क्या कभी अंबर से सूर्य बिछड़ता है
क्या कभी अंबर से सूर्य बिछड़ता है, क्या कभी बिन बाती दीपक जलता है.
कैसी है यह अनहोनी हर आंख हुई है नम, छोड़ गया जो तू कैसे जिएंगे हम.
तू ही किनारा तू ही सहारा तू जग सारा तू ही हमारा सूरज तू ही तारा.
जय जय कारा, जय जय कारा, स्वामी देना साथ हमारा.
जहां जहां तेरे पांव पड़े वह धरती अंबर हो जाए, जाने यह कैसी माया माया है तेरी.
तू निर्बल का बल है स्वामी रखवाला हम सबका, उसको क्या डर है जिस पर छाया है तेरी.
कणकण में है खुशहाली, झूमे है डाली डाली, हम प्यासों में जो रिमझिम बरसे है बादल से, तू ही वह अमृत की धारा.
जय जय कारा जय जय कारा स्वामी देना सारा
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